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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 33
किमत्र चित्रं यदि कामसूर्भूर्वृत्ते स्थितस्याधिपतेः प्रजानाम् । अचिन्तनीयस्तु तव प्रभावो मनीषितं द्यौरपि येन दुग्धा ॥
इसमें क्या आश्चर्य है कि प्रजा का पालन करने वाला राजा इच्छाओं को पूर्ण करने वाला हो? किंतु आपका प्रभाव तो अचिन्तनीय है, क्योंकि आपने स्वर्ग को भी इच्छित वस्तु देने के लिए दुहा है।
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