वसिष्ठमन्त्रोक्षणजात्प्रभावादुदन्वदाकाशमहीधरेषु । मरुत्सखस्येव बलाहकस्य गतिर्विजघ्ने न हि तद्रथस्य ॥
वसिष्ठ के मन्त्रों से प्राप्त प्रभाव के कारण उसके रथ की गति समुद्र, आकाश और पर्वतों में कहीं भी नहीं रुकी, जैसे वायु के मित्र मेघ की गति नहीं रुकती।
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