आप अनेक राजाओं के स्वामी होकर भी यज्ञ के कारण दरिद्रता को धारण कर रहे हैं, यह उचित ही है। जैसे देवताओं द्वारा बार-बार पिए जाने पर चन्द्रमा की कला का क्षय होना भी उसकी वृद्धि से अधिक प्रशंसनीय होता है।
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