भक्तिः प्रतीक्ष्येषु कुलोचिता ते पूर्वान्महाभाग तयातिशेषे । व्यतीतकालस्त्वहमभ्युपेतस्त्वामर्थिभावादिति मे विषादः ॥
हे महाभाग! आपकी कुलोचित उदारता तो पहले से ही प्रसिद्ध है और उसमें भी वृद्धि हुई है। किंतु मैं समय बीत जाने पर याचक भाव से आपके पास आया हूँ, यही मेरे लिए खेद का कारण है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।