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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 14
भक्तिः प्रतीक्ष्येषु कुलोचिता ते पूर्वान्महाभाग तयातिशेषे । व्यतीतकालस्त्वहमभ्युपेतस्त्वामर्थिभावादिति मे विषादः ॥
हे महाभाग! आपकी कुलोचित उदारता तो पहले से ही प्रसिद्ध है और उसमें भी वृद्धि हुई है। किंतु मैं समय बीत जाने पर याचक भाव से आपके पास आया हूँ, यही मेरे लिए खेद का कारण है।
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