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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 9
मन्दोत्कण्ठाः कृतास्तेन गुणाधिकतया गुरौ । फलेन सहकारस्य पुष्पोद्गम इव प्रजाः ॥
उसके श्रेष्ठ गुणों के कारण प्रजा में गुरु के प्रति विनम्रता उत्पन्न हुई, जैसे फल के साथ आम के वृक्ष में फूल भी आते हैं।
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