स हि सर्वस्य लोकस्य युक्तदण्डतया मनः । आददे नातिशीतोष्णो नभस्वानिव दक्षिणः ॥
उसने उचित दंड व्यवस्था से प्रजा का मन जीत लिया, जैसे दक्षिण पवन न अधिक ठंडा होता है न अधिक गर्म।
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