भल्लापवर्जितैस्तेषां शिरोभिः श्मश्रुलैर्महीम् । तस्तार सरघाव्याप्तैः स क्षौद्रपटलैरिव ॥
उनके बिना भालों के कटे हुए दाढ़ी-मूँछ वाले सिरों से भूमि ऐसे ढँक गई मानो मधुमक्खियों के झुंड से भरी हो।
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