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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 61
यवनीमुखपद्मानां सेहे मधुमदं न सः । बालातपमिवाब्जानामकालजलदोदयः ॥
यवन स्त्रियों के मुखकमलों का मधुर गर्व वह सह न सका, जैसे असमय मेघ का उदय कमलों के कोमल सूर्यताप को सह नहीं पाता।
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