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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 56
अभ्यभूयत वाहानां चरतां गात्रशिञ्जितैः । वर्मभिः पवनोद्धूतराजतालीवनध्वनिः ॥
चलते हुए वाहनों की ध्वनि और कवचों की झंकार ने वायु से हिलते ताड़वन की ध्वनि को भी दबा दिया।
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