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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 55
मुरलामारुतोद्धूतमगमत्कैतकं रजः । तद्योधवारबाणानामयत्नपटवासताम् ॥
मुरला पवन से उड़ती केतकी की धूल उसके योद्धाओं के वस्त्रों पर बिना प्रयास के ही रंग के समान लग गई।
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