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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 49
दिशि मन्दायते तेजो दक्षिणस्यां रवेरपि । तस्यामेव रघोः पाण्ड्याः प्रतापं न विषेहिरे ॥
दक्षिण दिशा में सूर्य का तेज भी मंद पड़ जाता है, परंतु उसी दिशा में पाण्ड्य राजा रघु के प्रताप को सह नहीं सके।
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