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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 48
भोगिवेष्टनमार्गेषु चन्दनानां समर्पितम् । नास्रसत्करिणां ग्रैवं त्रिपदीच्छेदिनामपि ॥
सर्पों के मार्गों में पड़े चन्दन के वृक्षों को काटते समय भी हाथियों की गर्दन से बंधी रस्सियाँ नहीं टूटीं।
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