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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 33
त्याजितैः फलमुत्खातैर्भग्नैश्च बहुधा नृपैः । तस्यासीदुल्बणो मार्गः पादपैरिव दन्तिनः॥
पराजित राजाओं द्वारा छोड़े गए और नष्ट किए गए प्रदेशों से उसका मार्ग ऐसा हो गया था जैसे हाथी द्वारा तोड़े गए वृक्षों से भरा वन।
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