स सेनां महतीं कर्षन्पूर्वसागरगामिनीम् । बभौ हरजटाभ्रष्टां गङ्गामिव भगीरथः॥
पूर्व समुद्र की ओर जाती हुई विशाल सेना का नेतृत्व करते हुए वह भगीरथ के समान प्रतीत हुआ, जैसे गंगा शिव की जटाओं से निकलकर बहती है।
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