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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 23
प्रसवैः सप्तपर्णानां मदगन्धिभिराहताः । असूययेव तन्नागाः सप्तधैव प्रसुस्रुवुः॥
सप्तपर्ण वृक्षों के पुष्पों की सुगंध से उद्दीप्त होकर हाथी मानो ईर्ष्या से सात धाराओं में मदजल बहाने लगे।
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