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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 20
इक्षुच्छायनिषादिन्यस्तस्य गोप्तुर्गुणोदयम् । आकुमारकथोद्धातं शालिगोप्यो जगुर्यशः ॥
गन्ने की छाया में बैठी हुई कृषक स्त्रियाँ उसके गुणों के उदय और बाल्यकाल की कथाओं को गाकर उसका यश गाती थीं।
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