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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 2
दिलीपानन्तरं राज्ये तं निशम्य प्रतिष्ठितम् । पूर्वं प्रधूमितो राज्ञां हृदयेऽग्निरिवोत्थितः ॥
दिलीप के बाद उसे राज्य में स्थापित देखकर अन्य राजाओं के हृदय में पहले से धूम्रित अग्नि की भाँति उत्साह जाग उठा।
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