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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 16
वार्षिकं संजहारेन्द्रो धनुर्जैत्रं रघुर्दधौ । प्रजार्थसाधने तौ हि पर्यायोद्यतकार्मुकौ ॥
इन्द्र वर्षा करता था और रघु विजयधनुष धारण करता था; दोनों ही प्रजा के हित में अपने-अपने कार्य में तत्पर रहते थे।
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