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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 13
कामं कर्णान्तविश्रान्ते विशाले तस्य लोचने । चक्षुष्मत्ता तु शास्त्रेण सूक्ष्मकार्यार्थदर्शिना ॥
यद्यपि उसकी आँखें कानों तक फैली हुई विशाल थीं, परंतु उसकी वास्तविक दृष्टि शास्त्रज्ञान से सूक्ष्म अर्थों को देखने में थी।
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