यथा प्रह्लादनाच्चन्द्रः प्रतापात्तपनो यथा । तथैव सोऽभूदन्वर्थो राजा प्रकृतिरञ्जनात् ॥
जैसे चन्द्रमा शीतलता से और सूर्य तेज से सुख देते हैं, वैसे ही वह राजा प्रजा को प्रसन्न करने वाला सिद्ध हुआ।
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