नयविद्भिर्नवे राज्ञि सदसच्चोपदर्शितम् । पूर्व एवाभवत्पक्षस्तस्मिन्नाभवदुत्तरः ॥
नीतिज्ञों ने नए राजा के सामने उचित-अनुचित सब प्रस्तुत किया, और उसमें सदैव उचित पक्ष ही प्रबल रहा, दूसरा नहीं।
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