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रघुवंशम् • अध्याय 4 • श्लोक 1
स राज्यं गुरुणा दत्तं प्रतिपद्याधिकं बभौ । दिनान्ते निहितं तेजः सवित्रेव हुताशनः ॥
गुरु द्वारा दिया गया राज्य ग्रहण करके वह और भी अधिक तेजस्वी हो उठा, जैसे दिन के अंत में अग्नि सूर्य का तेज धारण कर लेती है।
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