मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 7
क्रमेण निस्तीर्य च दोहदव्यथां प्रचीयमानावयवा रराज सा । पुराणपत्रापगमादनन्तरं लतेव संनद्धमनोज्ञपल्लवा ॥
धीरे-धीरे दोहद की पीड़ा समाप्त होने पर, उसके अंग विकसित होकर ऐसे शोभित होने लगे जैसे पुराने पत्तों के झड़ने के बाद लता में नए पल्लव निकलते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें