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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 68
तमभ्यनन्दत्प्रथमं प्रबोधितः प्रजेश्वरः शासनहारिणा हरेः । परामृशन्हर्षजडेन पाणिना तदीयमङ्गं कुलिशव्रणाङ्कितम् ॥
उसके लौटने पर प्रजापालक राजा ने उसे हर्षपूर्वक गले लगाया और उसके शरीर पर वज्र के चिह्न को अपने आनंद से भरे हाथों से स्पर्श किया।
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