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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 66
यथा स वृत्तान्तमिमं सदोगतस्त्रिलोचनैकांशतया दुरासदः । तवैव संदेशहराद्विशांपतिः श‍ृणोति लोकेश तथा विधीयताम् ॥
और जैसे यह घटना तीन नेत्रों वाले भगवान के अंशरूप कठिन प्राप्त इन्द्र को ज्ञात हो, वैसे ही आपके दूत के माध्यम से यह समाचार पहुँचाया जाए।
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