तथापि शस्त्रव्यवहारनिष्ठुरे विपक्षभावे चिरमस्य तस्थुषः । तुतोष वीर्यातिशयेन वृत्रहा पदं हि सर्वत्र गुणैर्निधीयते ॥
यद्यपि वह शत्रुता में कठोर बना रहा, फिर भी उसके अद्वितीय पराक्रम से इन्द्र प्रसन्न हुआ, क्योंकि श्रेष्ठता सदैव गुणों से ही स्थापित होती है।
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