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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 59
ततः प्रकोष्ठे हरिचन्दनाङ्किते प्रमथ्यमानार्णवधीरनादिनीम् । रघुः शशाङ्कार्धमुखेन पत्रिणा शरासनज्यामलुनाद्बिडौजसः ॥
तब रघु ने हरिचंदन से अंकित भुजा से, समुद्र के समान गंभीर ध्वनि करते हुए, चंद्राकार बाण से इन्द्र के धनुष की प्रत्यंचा काट दी।
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