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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 55
हरेः कुमारोऽपि कुमारविक्रमः सुरद्विपास्फालनकर्कशाङ्गुलौ । भुजे शचीपत्रविशेषकाङ्किते स्वनामचिह्नं निचखान सायकम् ॥
विष्णु के समान वीर उस कुमार रघु ने भी, अपनी कठोर उँगलियों से, इन्द्र के भुज पर अपने नाम का चिह्न अंकित कर दिया।
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