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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 52
स एवमुक्त्वा मघवन्तमुन्मुखः करिष्यमाणः सशरं शरासनम् । अतिष्ठदालीढविशेषशोभिना वपुःप्रकर्षेण विडम्बितेश्वरः ॥
ऐसा कहकर रघु धनुष-बाण सहित इन्द्र की ओर मुड़ा और अपनी वीर मुद्रा से ऐसा खड़ा हुआ मानो देवताओं को भी चुनौती दे रहा हो।
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