न मे ह्रिया शंसति किंचिदीप्सितं स्पृहावती वस्तुषु केषु मागधी । इति स्म पृच्छत्यनुवेलमादृतः प्रियासखीरुत्तरकोसलेश्वरः ॥
उत्तर कोसल का राजा सदा स्नेहपूर्वक अपनी प्रिय सखियों से पूछता था कि लज्जा के कारण वह मागधी रानी अपनी इच्छाएँ क्यों नहीं बताती।
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