हरिर्यथैकः पुरुषोत्तमः स्मृतो महेश्वरस्त्र्यम्बक एव नापरः । तथा विदुर्मां मुनयः शतक्रतुं द्वितीयगामी न हि शब्द एष नः ॥
जैसे विष्णु एकमात्र पुरुषोत्तम और शिव त्र्यम्बक ही माने जाते हैं, वैसे ही मुनि मुझे ही शतक्रतु कहते हैं, इस पद का दूसरा कोई अधिकारी नहीं है।
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