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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 40
विषादलुप्तप्रतिपत्ति विस्मितं कुमारसैन्यं सपदि स्थितं च तत् । वसिष्ठधेनुश्च यदॄच्छयागता श्रुतप्रभावा ददृशेऽथ नन्दिनी ॥
इस घटना से आश्चर्यचकित और दुख से स्तब्ध कुमारों की सेना वहीं रुक गई, तभी वसिष्ठ की धेनु नंदिनी, अपने प्रभाव से प्रकट होकर दिखाई दी।
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