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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 4
दिवं मरुत्वानिव भोक्ष्यते भुवं दिगन्तविश्रान्तरथो हि तत्सुतः । अतोऽभिलाषे प्रथमं तथाविधे मनो बबन्धान्यरसान्विलङ्घ्य सा ॥
उसका पुत्र इन्द्र के समान आकाश और पृथ्वी का भोग करेगा, यह जानकर उसने अन्य इच्छाओं को छोड़कर उसी प्रकार की इच्छा में अपना मन लगा लिया।
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