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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 37
विभावसुः सारथिनेव वायुना घनव्यपायेन गभस्थिमानिव । बभूव तेनातितरां सुदुःसहः कटप्रभेदेन करीव पार्थिवः ॥
वायु द्वारा बादलों के हटने पर जैसे सूर्य तेजस्वी हो उठता है, वैसे ही वह राजा अत्यंत प्रबल और असहनीय हो गया, जैसे बंधन तोड़ता हुआ हाथी।
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