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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 21
श्रुतस्य यायादयमन्तमर्भकः तथा परेषां युधि चेति पार्थिवः । अवेक्ष्य धातोर्गमनार्थमर्थविच्चकार नाम्ना रघुमात्मसम्भवम् ॥
राजा ने यह विचार कर कि यह बालक विद्या में पारंगत होकर और युद्ध में शत्रुओं का अंत करेगा, अर्थज्ञ होकर उसका नाम रघु रखा।
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