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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 19
सुखश्रवा मङ्गलतूर्यनिस्वनाः प्रमोदनृत्यैः सह वारयोषिताम्। न केवलं सद्मनि मागधीपतेः पथि व्यजृम्भन्त दिवौकसामपि ॥
मंगल वाद्यों की मधुर ध्वनि और स्त्रियों के आनंद नृत्य केवल राजा के महल में ही नहीं, बल्कि देवताओं के लोकों में भी गूँजने लगे।
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