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रघुवंशम् • अध्याय 3 • श्लोक 15
अरिष्टशय्यां परितो विसारिणा सुजन्मनस्तस्य निजेन तेजसा । निशीथदीपाः सहसा हतत्विषो बभूवुरालेख्यसमर्पिता इव ॥
उस नवजात के तेज से प्रसूतिगृह के दीपक फीके पड़ गए और ऐसे लगने लगे मानो चित्र में बनाए गए हों।
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