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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 8
लताप्रतानोद्ग्रथितैः स केशैरधिज्यधन्वा विचचार दावम् । रक्षापदेशान्मुनिहोमधेनोर्वन्यान्विनेष्यन्निव दुष्टसत्त्वान् ॥
लताओं से उलझे हुए केश और चढ़े हुए धनुष के साथ वह वन में विचरण करता हुआ मानो मुनियों की होमधेनु की रक्षा के लिए दुष्ट प्राणियों का नाश करने जा रहा था।
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