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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 74
पुरंदरश्रीः पुरमुत्पताकं प्रविश्य पौरैरभिनन्द्यमानः । भुजे भुजंगेन्द्रसमानसारे भूयः स भूमेर्धुरमाससञ्ज ॥
इन्द्र के समान वैभवशाली वह राजा ध्वजाओं से सुसज्जित नगर में प्रवेश कर, नागरिकों द्वारा स्वागत पाकर, पुनः अपने बलवान भुजाओं पर पृथ्वी का भार संभालने लगा।
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