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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 72
श्रोत्राभिरामध्वनिना रथेन स धर्मपत्नीसहितः सहिष्णुः । ययावनुद्घातसुखेन मार्गं स्वेनेव पूर्णेन मनोरथेन ॥
वह सहनशील राजा अपनी धर्मपत्नी सहित मधुर ध्वनि वाले रथ पर, बिना किसी बाधा के, मानो अपने पूर्ण हुए मनोरथ के साथ मार्ग पर आगे बढ़ा।
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