प्रदक्षिणीकृत्य हुतं हुताशमनन्तरं भर्तुररुन्धतीं च । धेनुं सवत्सां च नृपः प्रतस्थे सन्मङ्गलोदग्रतरप्रभावः ॥
अग्नि की प्रदक्षिणा करके, अरुन्धती और बछड़े सहित धेनु को प्रणाम कर, शुभ प्रभाव से युक्त वह राजा प्रस्थान करने लगा।
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