उत्तिष्ठ वत्सेत्यमृतायमानं वचो निशम्योत्थितमुत्थितः सन्। ददर्श राजा जननीमिव स्वां गामग्रतः प्रस्रविणीं न सिंहम् ॥
“उठो वत्स” इस अमृततुल्य वचन को सुनकर उठे हुए राजा ने सामने अपनी माता के समान दुग्ध प्रवाहित करती हुई गाय को देखा, सिंह को नहीं।
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