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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 6
स्थितः स्थितामुच्चलितः प्रयातां निषेदुषीमासनबन्धधीरः । जलाभिलाषी जलमाददानां छायेव तां भूपतिरन्वगच्छत् ॥
जब वह रुकती तो वह रुकता, जब चलती तो चलता, जब बैठती तो बैठता और जब वह जल पीती तो जल लेने की इच्छा से उसके पीछे छाया की तरह चलता था।
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