मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 54
कथं नु शक्योऽनुनयो महर्षेर्विश्राणनाच्चान्यपयस्विनाम् । इमामनूनां सुरभेरवेहि रुद्रौजसा तु प्रहृतं त्वयास्याम् ॥
अन्य गायों के दान से महर्षि को कैसे संतुष्ट किया जा सकता है, क्योंकि इसे तुमने रुद्र के बल से ही आहत किया है—इसे सुरभि की अद्वितीय संतान समझो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें