मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 5
आस्वादवद्भिः कवलैस्तृणानां कन्डूयनैर्दंशनिवारणैःश्च । अव्याहतैः स्वैरगतैश्च तस्याः सम्राट् समाराधनतत्परोऽभूत् ॥
वह सम्राट् तृण के स्वादिष्ट कौर, खुजली दूर करने और कीटों के दंश से बचाने के उपायों से तथा निर्बाध विचरण की सुविधा देकर उसकी सेवा में तत्पर रहा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें