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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 46
अथान्धकारं गिरिगह्वराणां दंष्ट्रामयूखैः शकलानि कुर्वन् । भूयः स भूतेश्वरपार्श्ववर्ती किंचिद्विहस्यार्थपतिं बभाषे ॥
तब अपने दाँतों की किरणों से पर्वत की गुफाओं के अंधकार को चीरता हुआ, भूतेश्वर का सहचर वह सिंह कुछ हँसकर पुनः राजा से बोला।
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