हे मृगराज, मेरी रुकी हुई चेष्टा के कारण जो वचन मैं कहना चाहता हूँ वह हास्यास्पद प्रतीत हो सकता है, किन्तु आप प्राणियों के अंतर्मन को जानते हैं, इसलिए मैं कहता हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।