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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 42
प्रत्यब्रवीच्चैनमिषुप्रयोगे तत्पूर्वभङ्गे वितथप्रयत्नः । जडीकृतस्त्र्यम्बकवीक्षणेन वज्रं मुमुक्षन्निव वज्रपाणिः ॥
बाण चलाने का प्रयत्न निष्फल होने पर, त्र्यम्बक की दृष्टि से जड़ हो गए वह राजा, जैसे वज्रपाणि वज्र छोड़ना चाहता हो, वैसे ही उस सिंह से बोला।
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