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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 41
इति प्रगल्भं पुरुषाधिराजो मृगाधिराजस्य वचो निशम्य । प्रत्याहतास्त्रो गिरिशप्रभावादात्मन्यवज्ञां शिथिलीचकार ॥
इस प्रकार निर्भीक वचन सुनकर पुरुषाधिराज ने, गिरिश के प्रभाव से निष्फल हुए अपने अस्त्र के कारण, अपने प्रति हुई अवमानना को त्याग दिया।
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