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रघुवंशम् • अध्याय 2 • श्लोक 35
कैलासगौरं वृषमारुरक्षोः पादार्पणानुग्रहपूतपृष्ठम् । अवेहि मां किंकरमष्टमूर्तेः कुम्भोदरं नाम निकुम्भमित्रम् ॥
मुझे कैलास के समान गौर वर्ण वाले वृषभ पर स्थित भगवान के चरणस्पर्श से पवित्र, अष्टमूर्ति के सेवक कुम्भोदर नामक निकुम्भ का मित्र जानो।
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